देहरादून। जिले में धान की फसल विषाणु जनित बौनापन ड्वार्फिंग रोग की चपेट में है। कृषि विशेषज्ञों ने विभिन्न क्षेत्रों की धान की खेती का निरीक्षण कर फसल को रोग से बचाने के उपाय बताए। मुख्य कृषि अधिकारी और कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने विकासखंड डोईवाला, रायपुर, सहसपुर, विकासनगर और कालसी के धान उत्पादक क्षेत्रों का भ्रमण कर खेतों का निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस बीमारी में पौधें से अधिक कल्ले निकलते हैं, पत्तियां छोटी रह जाती हैं और वृद्धि रुक जाती है। जड़े कत्थई या लाल पड़ने से बालियां और दाने नहीं बन पाते, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।पूर्व में यह केवल अगेती हाइब्रिड किस्मों तक सीमित था, लेकिन अब यह समस्त प्रजातियों में फैल रहा है। यह रोग रस चूसक कीटों फुदका से पफैलता है। कृषि विभाग की टीम ने किसानों को खेत साफ रखने, जलभराव की निकासी करने और जिंक-पोटाश के छिड़काव की सलाह दी। जैविक खेती करने वाले किसानों को नीम के अर्क का छिड़काव करने और विशेषज्ञों की सलाह के बिना कीटनाशकों के अंधधुंध इस्तेमाल से बचने की अपील की गई है।