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बीकेटीसी सीईओ रांगड़ के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां

लिखवार गांव। देश की प्रतिष्ठित माने जाने वाली श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के नव नियुक्त मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने पदभार ग्रहण तो कर लिया है किंतु उनके सामने चुनौतियां ही चुनौतियां खड़ी हैं। बीकेटीसी को ढर्रे पर लाने के लिए उन्हें काफी कसरत करनी होगी।

दरअसल सरकार ने हाल ही में कर्णप्रयाग के एसडीएम सोहन सिंह रांगड़ को बीकेटीसी का सीईओ नियुक्त किया है। कृषि मंडी समिति के सचिव रहे विजय प्रसाद थपलियाल को इस पद से असमय विदा करने के बाद कुछ दिनों तक रूद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा को सीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। अब शासन ने कर्णप्रयाग के एसडीएम पद पर कार्यरत सोहन सिंह रांगड़ को सीईओ की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। शासन के आदेशों के क्रम में उन्होंने पदभार भी ग्रहण कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने बीकेटीसी के सीईओ की नई पारी खेलनी शुरू कर दी है। अब रांगड़ को बदरीनाथ तथा केदारनाथ धामों के तीर्थयात्रियों को भव्य व दिव्य दर्शन कराने की व्यवस्था तो करानी ही होगी अपितु कर्मचारियों की एक बड़ी फौज को भी साथ लेकर चलना होगा। बीकेटीसी में मौजूदा दौर में करीब सात सौ से अधिक अधिकारी तथा कर्मचारी तैनात हैं। इनमें ज्यादातर कर्मचारी अस्थाई हैं। स्थानीय होने के कारण ये अल्प 7 हजार के मानदेय प्राप्त कर भगवान, यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। यहां तो आज केदारनाथ आपदा आए 13 वर्ष बीत रहे हैं इतने साल से कर्मचारियों के लिए केदारनाथ की हाड़ तोड़ ठंड में रहने के लिए आवास नहीं बना रहे है उल्टा पूर्व अध्यक्ष ने 10 करोड़ मुख्यमंत्री कोष में दिया है। जबकि अंग्रेज सरकार ने कमेटी को अपने शासन में सुविधा करने के लिए 6 हज़ार रुपए दिया था। यहां कमेटी का ढांचा भाजपा सरकार अपने कार्यकर्ताओं को लूट खसोट करने के लिए बनाया गया जनता कह रही है। वहां पर आपदा के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है।70 कर्मचारी 8 कमरों में भेड़ बकरी की भांति रह रहे हैं। कमेटी का काम करने का मन नहीं करता है वहां पर अध्यक्ष 2014से पूर्व की भांति नहीं रह रहे हैं। उनका मन मंदिर के धन को अपनी सुविधाओं पर खर्च करना अच्छा लगता है।कहा जा सकता है कि 350 से अधिक कर्मचारी अब भी नियमितीकरण की राह ताक रहे हैं। अस्थाई कर्मचारियों में सीजनल कर्मचारी भी शामिल हैं। कई-कई कर्मचारियों को तो नियुक्ति पत्र तक नहीं दिए गए हैं। एक तरह से इस तरह के कर्मचारी भजराम हवलदारी के रूप में अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे है। या इनके मन में उत्तराख़ में यात्रियों की सेवा करने से देश अच्छा संदेश देकर प्रदेश वाशियों को रोजगार देने के लिए त्याग कर रहे हैं।इन्हें मानदेय भी श्रम कानूनों के अनुरूप न देकर ध्याडी के रूप में भी कम दिया जा रहा है। इस तरह उनका जीवन भगवान भरोसे चल रहा है।

बताते चलें कि पिछले साल केदारनाथ उप चुनाव में यह मामला तेजी से उठा था। तब सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अस्थाई कर्मचारियों के वन टाइम सेटलमेंट का भरोसा दिया था। यह मामला मुख्यमंत्री की घोषणा में भी शामिल है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने अस्थाई कर्मचारियों के वेतन और मानदेय में बढ़ोत्तरी का आदेश जारी किया है। इसका 70 अस्थाई कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। लंबे समय से कार्य कर रहे अस्थाई कर्मचारियों को श्रम विभाग की अकुशल, अर्द्धकुशल तथा कुशल श्रेणी के मानकों के अनुरूप मासिक मानदेय देने का निर्णय भी बीकेटीसी बोर्ड बैठक में लिया गया है। बोर्ड के प्रस्ताव के अनुरूप वेतन व मानदेय बढ़ोत्तरी के लिए आदेश जारी तो हो गए हैं किंतु वन टाइम सेटलमेंट अथवा विनियमितीकरण का कारण का मामला शासन स्तर पर लटका पड़ा है। जनता की कमाई से शासन में मोटी पगार प्राप्त कर रहे अधिकारी कई विभाग की फाइल में काम करने के बजाय इधर से उधर घूमने में समय और धन बर्बाद कर रहे हैं।इसी तरह नियमित कर्मचारियों और अधिकारियों के पदोन्नति के मामले भी अधर में लटके पड़े हैं। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति कर्मचारी संघ ने पदोन्नति 2022 से पदोन्नति न होने पर नाराजगी जताई है। संघ के अध्यक्ष विजेंद्र बिष्ट की ओर से बीकेटीसी अध्यक्ष को पत्र भी लिखा गया। इसमें कहा गया है कि विभागीय पदोन्नति समिति के माध्यम से प्रोन्नति के आदेश तो जारी हुए थे किंतु अभी तक अमल में नहीं आ पाए हैं। उप समिति द्वारा 17 फरवरी 2026 को बैठक कर प्रोन्नति की सिफारिश की गई थी।

किंतु इस मसले पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इसके चलते खाली पड़े पदो पर पदोन्नति न होने से कर्मचारी मायूस हो चले हैं। हालांकि तबादलों की मांग भी की गई थी किंतु तबादलों में जरा सी भी देरी नहीं की गई।

बदरीनाथ मंदिर में वेदपाठियों की नियुक्ति का मामला भी 2018 से लटका पड़ा है। इसके चलते बदरीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना और भोग व्यवस्था के लिए वेदपाठियों का टोटा बना है। हालांकि इन पदों पर नियुक्ति के लिए 2018 से कवायद चल रही है। मौजूदा दौर में धर्माधिकारी का पद भी प्रभारी के भरोसे चल रहा है। इन पदों को भरने के लिए विज्ञापन भी जारी हुआ था किंतु आवेदकों अथवा चेहतों के भारी दबाव के चलते बोर्ड इस मामले में नियुक्ति करने से हाथ पीछे खींच रहा है। मौजूदा दौर में केदारनाथ अधिष्ठान के वेदपाठी को बदरीनाथ के धर्माधिकारी पद पर प्रभारी के तौर पर तैनाती दी गई है। यहां तक की वेदपाठियों की नियुक्ति न होने से रघुनाथ कृति संस्कृत विद्यालय के एक शिक्षक को यात्रा काल में बदरीनाथ में तैनात किया गया है। उप मुख्य कार्याधिकारी, विशेष कार्याधिकारी तथा कार्याधिकारी के पद भी खाली चल रहे हैं। इन पदों को पदोन्नति से भरा जा सकता था किंतु इस मामले में अभी कोई फैसला लेने में हिचकिचाहट महसूस की जा रही है।

अब जबकि पीसीएस अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने पदभार ग्रहण कर लिया है तो उन्हें बीकेटीसी को पटरी पर लाने के लिए इन सवालों पर कसरत करनी होगी। इसके चलते ही मंदिर समिति का ढांचा सुदृढ़ हो सकेगा। ऐसा नहीं किया गया तो मंदिर समिति की व्यवस्था पटरी पर आने मुश्किल हो जाएगी। 46 मंदिरों की व्यवस्था समझने में और करने में समय लग जाता है तो मुख्य कार्याधिकारी का कार्यकाल का समय कम है।संपादक के श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति कर्मचारी संघ के संरक्षक रहते हुए शासन से सी ई ओ का कार्य काल 5 वर्ष करने की पहल की थीं। इसके फल स्वरूप हमारे सकारात्मक सोच से कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह बिष्ट के कार्यकाल में 33 कर्मचारियों की नियुक्ति हुई। प्रसिद्ध उद्योग पति अम्बानी जी ने भी दान देना शुरू किया। पिछली सरकार ने व्यवस्था बदलने पर दो बार वेतन देने एवं भगवान की पूजा विधि विधान से करने के लिए हमने 29 मई 2021 में धरना प्रदर्शन मौन व्रत रख कर प्रयास किया ।जो काम समिति को करना चाहिए वह हो नही रहा है। अपनी सुविधाओं में इच्छा शक्ति का उपयोग किया जा रहा है। ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद अपनी संपत्ति पर कब्जा नहीं ले पा रहे हैं। या उसका विकास नहीं कर रहे हैं। इस प्रवृत्ति से दानि लोगों का उत्साह कम हो रहा है।अल्प मानदेय प्राप्त कर्मचारियों का स्थानांतरण केदारनाथ करना कहां तक उचित है जहां 12 हज़ार रुपए महीना तक मानदेय मिलेगा वहीं कम से कम एक सो रूपये में एक समय भोजन कर सकता है ।वह कम से कम एक महीने में 8500 का खर्चा करेगा रहने की व्यवस्था नहीं है तो बीमारी अलग से होगी। इसका मूल्यांकन करने वाले लोग समिति में नहीं दिखाई देते हैं। ऋषिकेश कार्यालय शिप्ट करने उसका किराया देने से समिति को आनन्द आता है। देश वासियों को याद दिलाना है कि पहाड़ों की गूंज हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र में समिति की आय बढ़ाने और यात्रियों को सुविधाएं प्रदान करने हेतु सुझाव प्रकाशित करने के बाद समिति ने उस पर अमल किया है तब यात्रा करने वाले लोगों की संख्या बढ़ती गई। अभी बीते वर्ष पहाड़ों की गूंज हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र ने समिति को अच्छे स्वास्थ्य सुझाव प्रकाशित किए हैं उनपर अमल करने के बाद प्रदेश का अच्छा काम देश दुनिया को दिखाई देगा। मंदिर समिति कर्मचारी संघ के सहयोग से सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।अब देखना यह है कि नए सीईओ इस तरह की चुनौतियों से किस तरह पार पाते हैं। इस पर ही उनकी अग्नि परीक्षा भी होगी।

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