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कुलगुरु और गुरुकुल परंपरा से ही बचेगा सनातन परिवार:श्री रतन वशिष्ठ जी महाराज

कुलगुरु और गुरुकुल परंपरा से ही बचेगा सनातन परिवार: *काशी की धरा पर पूज्य श्री रतन वशिष्ठ जी महाराज का ओजस्वी उद्घोष*

The Sanatan family will survive only through the Gurukul tradition.


काशी की पावन धरा पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक सद्भावना बैठक आज एक ऐतिहासिक वैचारिक क्रांति की साक्षी बनी, जहाँ वन शक्ति देवी धाम के पीठाधीश्वर एवं ऋषि सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूज्य श्री 1008 रतन वशिष्ठ जी महाराज ने अपने प्राणवान उद्बोधन से सनातन समाज की वर्तमान चुनौतियों पर गहरा प्रहार किया। राष्ट्र और धर्म सेवा में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर चुके महाराज श्री ने अत्यंत व्यथित हृदय से बढ़ते हुए तलाक और बिखरते परिवारों के पीछे ‘मोबाइल रूपी भस्मासुर’, आधुनिक समाज की विकृतियों और न्यायपालिका की विसंगतियों को मुख्य कारण बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के समय में कुटुंब प्रबंधन के लिए हमें पुनः ‘कुलगुरु और गुरुकुल’ की प्राचीन परंपरा की महती आवश्यकता है, क्योंकि संस्कारों के बिना परिवार ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं। महाराज श्री ने चेतावनी दी कि मोबाइल का सदुपयोग जहाँ वरदान है, वहीं इसका अनियंत्रित दुरुपयोग परिवारों का विनाश कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि एक ही छत के नीचे अलग-अलग मतांतरों के लोग रह सकते हैं, बशर्ते परिवार का मुखिया स्वयं को परिस्थितियों के अनुकूल रखे और उसका आचरण धैर्यवान व सही हो। महाराज श्री ने न केवल सामाजिक कुरीतियों बल्कि दोषपूर्ण कानून व्यवस्था, न्यायपालिका की कमियों और दिशाहीन राजनीतिक व्यवस्थाओं पर भी बेबाकी से उंगली उठाई।
महाराज श्री वशिष्ठ जी के इन तीखे और तार्किक विचारों का काशी के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी महाराज ने पूर्ण समर्थन किया। शंकराचार्य जी ने कड़े स्वर में कहा कि मंदिरों का धन केवल मंदिरों और सनातन धर्म के उत्थान के लिए ही व्यय होना चाहिए, साथ ही उन्होंने न्यायपालिका की निष्पक्षता और समाज को बांटने वाली राजनीति को राष्ट्र के लिए घातक बताया। इस महत्वपूर्ण विमर्श के दौरान आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी श्रीमान सोनी जी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। महाराजश्री ऋषि सनातन संघ के माध्यम से सवा लाख कार्यकर्ताओं का एक समर्पित संगठन शीघ्र स्थापित करेंगे!

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