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जंगली जानवरों से सुरक्षित फसलों के क्षेत्र विस्तार पर जोर दिए जाने के दिये निर्देश

लखपति दीदी योजना की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने दिए आत्मनिर्भरता व उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने के निर्देश

 पौड़ी – जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में आज जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में लखपति दीदी योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण एवं स्थानीय उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भर आर्थिकी के लक्ष्य पर विस्तृत चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सभी सम्बन्धित रेखीय विभागों को निर्देश दिए कि कृषि, उद्यान, पशुपालन और आजीविका योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त दिशा मिल सके।

मंगलवार को आयोजित लखपति दीदी योजना की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि पौड़ी जनपद में कृषि, उद्यान एवं पशुपालन से जुड़ी योजनाओं के समन्वय से स्थानीय स्तर पर आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनपद के प्राकृतिक संसाधनों और बाजार संभावनाओं को देखते हुए योजनाओं को स्थानीय किसानों, उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूहों के हित में व्यावहारिक स्वरूप दिया जाए।

उन्होंने उद्यान विभाग को निर्देशित किया कि श्रीनगर, लैंसडाउन, कोटद्वार एवं यमकेश्वर जैसे बड़े बाजारों में सब्जी की मांग को देखते हुए सामुदायिक फेडरेशनों को उपभोक्ता मांग के अनुरूप सब्जी उत्पादन के लिए प्रेरित किया जाए। कहा कि स्थानीय काश्तकारों/समूहों को प्रशिक्षण, विपणन और तकनीकी सहायता मिले तो वे ही स्थानीय मंडियों की आपूर्ति में आत्मनिर्भरता का आधार बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सब्जियों, फलों और दुग्ध उत्पादों जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और शेल्फ-लाइफ बनाए रखने हेतु कलेक्शन सेंटर, कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड वैन की व्यवस्था आवश्यक है। इस पर जिलाधिकारी ने परियोजना प्रबंधक (रीप) को निर्देश दिए कि ऐसे उत्पादों के सुरक्षित परिवहन के लिए रेफ्रिजरेटेड वैन की खरीद की कार्यवाही शीघ्र प्रारंभ की जाए। साथ ही उत्पादन क्षेत्रों में कलेक्शन सेंटर विकसित किए जाएं ताकि उत्पाद सीधे बाजार तक बिना क्षति पहुँच सकें।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि ऐसे कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए जिनको जंगली जानवरों से नुकसान की संभावना न के बराबर हो। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे फसलों के क्षेत्र विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाए जो कम जोखिम वाली हों और किसानों के लिए स्थायी आय का माध्यम बन सकें।

उन्होंने पॉलीहाउस वितरण के उपरांत उनके उपयोग की अनिवार्य निगरानी करने के निर्देश दिए। कहा कि व्यापक वितरण के बावजूद उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि नहीं दिख रही है। उद्यान विभाग को निर्देश दिया गया कि पिछले पाँच वर्षों में वितरित पॉलीहाउस की स्थिति रिपोर्ट दो दिन में प्रस्तुत करें।

उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि फार्म मशीनरी बैंक से किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे उपकरणों की गुणवत्ता पर किसानों से फीडबैक लिया जाए, ताकि आगामी चरणों में बेहतर मशीनरी का चयन हो सके। उन्होंने कहा कि किसानों की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप मशीनरी उपलब्ध कराना ही कृषि दक्षता का मूल आधार है।

एनआरएलएम व यूएसआरएलएम के अंतर्गत सक्रिय सामुदायिक फेडरेशनों के सुदृढ़ीकरण पर बल देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि इन फेडरेशनों का सतत फॉलोअप किया जाए, साथ ही उन्हें हर संभव तकनीकी, प्रशिक्षण और विपणन सहायता प्रदान की जाए।

उन्होंने परियोजना निदेशक, डीआरडीए को निर्देश दिए कि स्वच्छता एवं सौंदर्य उत्पादक समूहों (जैसे साबुन, शैम्पू, हर्बल उत्पाद इत्यादि) के उत्पादों का लैब टेस्ट और प्रमाणन शीघ्र कराकर उनकी बाजार विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धा क्षमता को मजबूत किया जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि पारंपरिक उत्पादों में सुधार या स्थानीय संसाधनों पर आधारित नए उत्पादों के विकास से ही किसानों और महिला समूहों की आर्थिकी में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वैश्विक बाजार में अब हर क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के बीज व प्रौद्योगिकियाँ उपलब्ध हैं, जिन्हें अपनाकर स्थानीय उत्पादकों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

उन्होंने विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि सामुदायिक स्तरीय फेडरेशनों (सीएलएफ) को ऐसे उत्पाद निर्माण हेतु प्रेरित किया जाए जिनका कच्चा माल स्थानीय रूप से उपलब्ध और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हो, जिससे फेडरेशन भविष्य की प्रतिस्पर्धा में आत्मनिर्भर रह सकें।

बैठक में बताया गया कि एनआरएलएम के तहत जिले में 7,215 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें 44,551 महिला सदस्य हैं। इनमें से 25,138 महिलाएँ लखपति दीदी के रूप में उभर चुकी हैं।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी पंजीकृत समूहों को प्राथमिक, मध्यम एवं उत्कृष्ट श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाए ताकि उनकी कार्यकुशलता और उत्पादकता के आधार पर सहयोग की प्रक्रिया और प्रभावी रूप से संचालित की जा सके। बैठक में पशुपालन व डेयरी विभाग के कार्यों की भी समीक्षा करते हुए उन्होंने थलीसैण में स्थापित घी ग्रोथ सेंटर को ऐसी जगह स्थापित करने के निर्देश दिए जहाँ दुग्ध उत्पादन अधिक हो।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुनवन्त, सहायक निदेशक डेयरी नरेंद्र लाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा, प्रबंधक उद्योग उपासना सिंह, कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी अरविंद भट्ट, परियोजना प्रबंधक रीप कुलदीप बिष्ट सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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