पौड़ी; रविवार को चंद्र ग्रहण सूतक पर प्रसिद्व सिद्धपीठ मां भुवनेश्वरी मंदिर के कपाट दोपहर करीब 12ः57 मिनट पर बंद किए गए। पंडित आचार्य नवीन ममगांई ने बताया कि सूतक के प्रारम्भ होने से पूर्व ही मंदिर के कपाट बंद किए गए। सूतक के दौरान सभी मंदिर आदि के कपाट बंद हो जाते हैं। शास्त्राीय कारण माना जाता है कि ग्रहण लगने से पूर्व ही सूतिकाल ;सूतकद्ध प्रारम्भ हो जाता है। शास्त्रानुसार इस समय वातावरण में अशुद्ध तरंगें पफैलती हैं, इसलिए पूजा-अर्चना निषि( होती है। इसलिए देवप्रतिमा की रक्षा के लिए ग्रहणकाल में गर्भगृह को बंद करके मूर्तियों को ढक दिया जाता है। ताकि उन पर अशु(ि का प्रभाव न पड़े। इस दौरान पूजा-वर्जन रहती हैं। ग्रहण के समय जप, ध्यान, दान श्रेष्ठ माने गए हैं लेकिन पूजा, आरती, भोग आदि नहीं किए जाते। इसलिए मंदिर बंद कर दिए जाते हैं। सूतक समाप्ति के पश्चात शुद्धिकरण के बाद पुनःविध्वित पूजा आदि का शुभारंभ किया जायेगा।