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Tue. Jul 7th, 2026

श्रीलंका के 40 अधिकारियों ने किया यूएसडीएमए का भ्रमण

श्रीलंका के अधिकारियों को भाया उत्तराखण्ड का आपदा प्रबंधन मॉडल 
देहरादून। नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस एनसीजीजी के तत्वावधान में आपदा प्रबंधन विषय पर आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीलंका के 40 सदस्यीय सिविल सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यूएसडीएमए का भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखण्ड में विकसित आपदा प्रबंधन प्रणाली, आधुनिक तकनीकों, पूर्व चेतावनी तंत्र, भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली तथा सामुदायिक सहभागिता आधारित पहलों का विस्तृत अध्ययन किया।
यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल आपदा के समय राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, संस्थागत समन्वय, क्षमता निर्माण तथा आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर आधारित एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से आपदा प्रबंधन को अध्कि प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन एवं डीआईजी राजकुमार नेगी ने प्रतिभागियों को बताया कि उत्तराखण्ड में आपदाओं के दौरान त्वरित एवं समन्वित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एक सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित किया गया है। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र एसईओसीद् एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों डीईओसी की कार्यप्रणाली, घटना प्रतिक्रिया प्रणाली आईआरएस, बहु-स्रोत पूर्व चेतावनी प्रणाली, आपदा अलर्ट जारी करने की प्रक्रिया तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित निर्णय सहायता प्रणालियों की विस्तार से जानकारी दी।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य की मौसम पूर्वानुमान एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग आईएमडी उपग्रह आधारित अवलोकन प्रणाली, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र ;एडब्ल्यूएसद्ध, स्वचालित वर्षामापी यंत्रा ;एआरजीद्ध तथा अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से लगातार मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र करता है। इन आंकड़ों का रियल-टाइम विश्लेषण कर अल्पकालिक, मध्यम अवधि एवं प्रभाव आधारित मौसम पूर्वानुमान तैयार किए जाते हैं।
उत्तराखण्ड भू-स्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य में भूस्ऽलन जोखिम न्यूनीकरण के लिए किए जा रहे वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संवेदनशील ढलानों की विस्तृत भू-वैज्ञानिक एवं भू-तकनीकी जांच, रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस आधारित मानचित्रण, ड्रोन सर्वेक्षण, ढलानों की सतत निगरानी, वर्षा आधरित भूस्खलन विश्लेषण तथा जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन अध्ययनों के आधर पर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां स्थायी उपचारात्मक उपाय, ढलान स्थिरीकरण, जल निकासी सुधर तथा आवश्यक इंजीनियरिंग कार्य किए जाते हैं। श्रीलंका में भी अत्यध्कि वर्षा एवं भूस्ऽलन की घटनाएं सामान्य होने के कारण प्रतिनिध्मिंडल ने उत्तराऽण्ड की इन व्यवस्थाओं में विशेष रुचि दिखाई। इस अवसर पर एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए.पी. सिंह, डॉ. एमके भण्डारी, यूएसडीएमए के आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ डॉ. पीडी माथुर, श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल में सुश्री हेवाजुलिगे मधुपानी अप्सरा चित्रानाली पियासेना, बामुनु अरच्चिगे चमरा प्रेमनाथ बामुनु अरच्ची तथा एडम लेब्बे मोहम्मद अजमी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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