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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ पत्रकार श्री अनुपम त्रिवेदी जी की माताजी श्रीमती गीता त्रिवेदी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने THDC देहराखास, पथरी बाग स्थित श्री त्रिवेदी के आवास पर पहुंचकर शोकाकुल परिजनों से भेंट की और अपनी गहन संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिवार को इस दुःख की घड़ी में धैर्य और संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी एवं महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी ने भी श्री अनुपम त्रिवेदी जी के आवास पर जाकर परिजनों से मुलाकात की और अपनी शोक संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
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LIVE: केंद्रीय बजट 2026 – 27 के संबंध में प्रदेश भाजपा कार्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस*
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*मुख्यमंत्री ने किया श्रमिक प्रशिक्षण पोर्टल का शुभारंभ*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UKBOCW), श्रम विभाग, उत्तराखण्ड द्वारा विकसित श्रमिक प्रशिक्षण प्रबंधन प्रणाली (Training Management System – TMS) का शुभारंभ किया। यह पोर्टल पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के कौशल विकास को पारदर्शी, प्रभावी एवं तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार श्रमिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूर्णतः ऑनलाइन एवं पारदर्शी बनाए जाने के उद्देश्य से इस पोर्टल का विकास किया गया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कौशल प्रशिक्षण के उपरांत श्रमिकों के सर्वांगीण विकास से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं पर भी प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही राज्य के उद्यमियों से कौशल आवश्यकताओं के संबंध में नियमित फीडबैक लिया जाए, ताकि प्रशिक्षण को रोजगार से बेहतर रूप से जोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्लम्बर, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन आदि व्यवसायों में प्रशिक्षण पर विशेष बल देने के निर्देश दिए, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति स्थानीय श्रमिकों से हो सके और रोजगार के अवसर बढ़ें। इससे क्षेत्रीय जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
उन्होंने प्रशिक्षणोपरांत फॉरवर्ड लिंकेज को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए श्रम विभाग द्वारा संचालित डीबीटी योजनाओं की सराहना की तथा UKBOCW को अपनी आय बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयास करने के निर्देश भी दिए।
*इस पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण व्यवस्था को बनाया जाएगा पारदर्शी व प्रभावी*
श्रम विभाग के सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दंकी ने बताया कि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी योजनाओं को अधिक पारदर्शी एवं परिणामोन्मुखी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इस दौरान श्रमायुक्त पी.सी. दुमका द्वारा पोर्टल की कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
उन्होंने कहा कि श्रमिक प्रशिक्षण पोर्टल (TMS) के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदाताओं, मूल्यांकनकर्ताओं, प्रशिक्षण केंद्रों एवं प्रशिक्षकों का चयन भारत सरकार में इम्पैनल्ड (Impanelled) संस्थाओं एवं प्रमाणित व्यक्तियों से पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपस्थिति एवं मूल्यांकन भी डिजिटल माध्यम से सुनिश्चित होंगे।
इस पोर्टल से—
– प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
– डुप्लीकेसी की प्रभावी रोकथाम होगी।
– प्रशिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होगा।
– प्रशिक्षित श्रमिकों का केन्द्रीयकृत डाटाबेस उपलब्ध होगा।
– प्रशिक्षण प्रदाताओं एवं संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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*मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय बजट 2026–27 को बताया विकसित भारत @2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का रोडमैप*
*पर्यटन, विनिर्माण, आयुष, ग्रीन एनर्जी, कौशल विकास, रोजगार और शहरी अवसंरचना से राज्य के समावेशी व सतत विकास को मिलेगी नई गति*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बलवीर रोड स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में आयोजित मीडिया प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय बजट 2026–27 को विकसित भारत @2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट देश की आत्मा, आत्मविश्वास और विकासशील सोच को मजबूती प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय में की गई बढ़ोतरी से दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव रखी गई है। यह बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता को भी सुदृढ़ करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट के तीन प्रमुख स्तंभ—संतुलित एवं समावेशी विकास, वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण और सबका साथ-सबका विकास—दूरस्थ के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों, गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों, बच्चों और वंचित वर्गों सभी के समग्र उत्थान का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं।
उन्होंने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास से उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों को विशेष लाभ मिलेगा। प्रत्येक जनपद में महिला छात्रावास की व्यवस्था से महिला सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण को नई मजबूती मिलेगी। ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘विश्वास आधारित शासन’ से निवेश, रोजगार और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में किए गए विविध और नीतिगत प्रावधानों से उत्तराखंड में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। आयुष, फार्मा, हथकरघा, खादी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। ग्रीन एनर्जी पर विशेष फोकस से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय एवं वन संपदा से समृद्ध राज्य में ग्रीन इकोनॉमी को बल मिलेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप उत्तराखंड के हितों का ध्यान रखा गया है। राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर केंद्र सरकार को दिए गए प्रस्तावों और अनुरोधों को भी बजट में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित किया गया है, जो राज्य-केंद्र के सहयोगात्मक संघवाद का सशक्त उदाहरण है।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026–27 उत्तराखंड को रोजगार, निवेश, निर्यात, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा और राज्य के समावेशी, संतुलित व सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में विकासकार्यों की जनपद्वार समीक्षा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय 2047 विजन डॉक्यूमेंट की तर्ज पर सभी

ज़िलाधिकारियों को जिला एवं पंचायत स्तर पर भी विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर, खण्ड स्तर और जनपदों के विजन डॉक्यूमेंट की दिशा में शीघ्र कार्य किया जाए। इसके लिए आवश्यक वर्कशॉप भी शीघ्र आयोजित कराई जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि जिला योजना के लिए जिला योजना समितियों को बैठकें मार्च माह तक अनिवार्य रूप से करवा ली जाएं। इसके लिए अभी से होमवर्क शुरू किया जाए ताकि योजनाओं को समय से पूर्ण करने के लिए पहले से तैयारी रहे। उन्होंने कहा कि जिला योजना में शामिल किए जाने वाले संभावित कार्यों की प्रक्रिया के पहलुओं को पूर्ण कराते हुए एस्टीमेट तैयार करवा लिए जाएँ।
मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यान विभाग, कृषि विभाग एवं पशुपालन विभाग को जनपद स्तर पर खरीद के लिए शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने खरीद के लिए मूल्य निर्धारण के साथ ही एक वर्ष के बजाए 2 से 3 वर्षों के लिए मूल्य निर्धारित करने जैसे उपायों का भी परीक्षण कराया जा सकता है। आमजनमानस की समस्याओं के निस्तारण के लिए यदि जिला योजना की गाइडलाइंस और नियमों में सुधार की आवश्यकता है तो किए जाने चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि जन जन की सरकार में प्राप्त समस्याओं के निस्तारण के लिए भी योजनाएं तैयार की जाएँ, साथ ही कार्य प्रकृति के अनुरूप जिला एवं राज्य योजना में शामिल करवाया जाए। उन्होंने राज्य सेक्टर एवं डीएपी, सीसीएस आदि की मासिक बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित कराई जाएं।
मुख्य सचिव ने आजीविका से जुड़ी सभी विभागों की योजनाओं को गंभीरता से लिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जनपद स्तर पर मासिक रूप से समीक्षा की जाए साथ ही त्रैमासिक रूप से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर इन योजनाओं की समीक्षा आयोजित की जाए।
मुख्य सचिव ने राजकीय महिला विद्यालयों को टॉयलेट्स निर्माण से 08 मार्च, 2026 तक सैचुरेट किए जाने के निर्देश को दोहराया। उन्होंने टॉयलेट्स की सफाई व्यवस्था के लिए ठोस योजना भी तैयार किए जाने की बात कही।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री शैलेश बगौली, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, श्री चंद्रेश कुमार यादव, आयुक्त कुमाऊं श्री दीपक रावत, आयुक्त गढ़वाल श्री विनय शंकर पाण्डेय, सभी जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में राजस्व विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए लम्बित मामलों को शीघ्र निस्तारण की बात कही।
मुख्य सचिव ने सभी ज़िलाधिकारियों को धारा 34 एवं 143 के वादों के निस्तारण के लिए अभियान चलाये जाने पर जोर दिया। उन्होंने ज़िलाधिकारी नैनीताल की तर्ज पर निर्विवाद मामलों को कैम्प आयोजित कर त्वरित निस्तारण को प्रत्येक जनपद में लागू किए जाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने 143 के मामलों को भी 6 माह या इससे अधिक समय तक लंबित रखे जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 143 के वादों को निस्तारण के लिए 45 दिन का समय निर्धारित किया जाए। उन्होंने राजस्व
मुख्य सचिव ने मंडल स्तर पर मंडलायुक्त एवं जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों द्वारा अपने न्यायालय एवं सत्र न्यायालय में सबसे पुराने 5 मामलों को चिन्हित कर उनके निस्तारण पर कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह इसकी बैठक आयोजित की जाए, और प्रत्येक माह पुराने मामले निस्तारित करते हुए उनकी जगह सबसे पुराने अन्य मामलों को शामिल किया जाए।
मुख्य सचिव ने प्रदेशभर के 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित कुल 1760 मामलों का 10 प्रतिशत मामले मार्च 2026 तक निस्तारण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य किए जाने पर प्रशस्ति पत्र के साथ ही वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में भी प्रतिबिंबित होना सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने जन जन की सरकार कार्यक्रम को शहरी क्षेत्रों में भी शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्यक्रम अच्छा कर रहा है। इसे शहरी क्षेत्रों में तत्काल शुरू किया जाना चाहिए। इसके लिए कैम्प आयोजित किए जाने हेतु योजना तैयार कर ली जाए, साथ ही, कैम्प आयोजित किए जाने से पहले क्षेत्र में इसका प्रचार प्रसार किया जाना सुनिश्चित किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इन कैम्प का लाभ ले सकें।
मुख्य सचिव ने मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, एसडीएम आदि को अपने अंतर्गत तहसीलों, विकासखंड एवं थानों का निरीक्षण अनिवार्य रूप से किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में मॉडर्न पटवारी चौकियों का निर्माण के साथ ही पटवारी-कानूनगो आदि को शीघ्र लैपटॉप उपलब्ध कराये जाएँ, ताकि विभागीय ऑनलाइन गतिविधियों की कार्यवाही शीघ्र से पूर्ण कर ली जाए। मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में आधुनिक रिकॉर्ड रूम भी तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। आधुनिकीकरण के लिए बजट को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है तो नए वित्तीय वर्ष में इसका प्रविधान कर लिया जाए।
मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग के तहत रिक्त पदों के सापेक्ष भर्तियों के अधियाचन शीघ्र भेजे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय पदोन्नतियां भी समय पर कराये जाने पर जोड़ दिया। साथ ही उन्होंने पीएम किसान योजना के तहत किसानों का पंजीकरण कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाने का भी लक्ष्य दिया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री एस.एन. पाण्डेय, राजस्व परिषद आयुक्त श्रीमती रंजना राजगुरु सहित जनपदों मंडलायुक्त श्री दीपक रावत एवं श्री विनय शंकर पाण्डेय सहित सभी जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।
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अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन के निष्कर्षों की समीक्षा के साथ राज्य की कानून व्यवस्था व प्रशासन को लेकर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक…
बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के जिला अधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ ही शासन के उच्च अधिकारी सम्मिलित
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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में गृह विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों कठोर कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों को जनपद एवं पुलिस हेडक्वार्टर स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग कर शीघ्र मामलों के निस्तारण की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने प्रदेश में अभियोजन और फॉरेंसिक जांचों के लिए अपने सिस्टम को और मजबूत किए जाने पर बल दिया, ताकि इसकी प्रगति और मॉनिटरिंग अच्छे प्रकार से हो सके। उन्होंने कहा कि ई-समन व्यवस्था को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि आमजन की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 1905 पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी एवं एसएसपी स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि गृह/पुलिस विभाग के अंतर्गत वादों के निस्तारण के लिए थाना और तहसील दिवस आयोजन भी शुरू किया जाना चाहिए। सर्वप्रथम इसके लिए इसकी एसओपी तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस एसओपी के लिए सचिव गृह, सचिव राजस्व, मंडलायुक्त एवं पुलिस विभाग मिलकर एक एसओपी तैयार करे। उन्होंने मामलों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह 2 से 3 कैम्प आयोजित किए जा सकते हैं।
मुख्य सचिव ने थानों में जमा जब्त वाहनों की नीलामी कर खाली कराया जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में लम्बित मामलों से संबंधित वाहनों के डिस्पोजल के लिए और क्या किया जा सकता है, इसे एक्स्प्लोर कर लिया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पॉक्सो के मामलों पर तत्काल कार्यवाही करते हुए कठोर से कठोर कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम लगातार अपने पैर पसार रहा है इसे रोकने के लिए ठोस कार्यवाही और सिस्टम को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
मुख्य सचिव ने वन स्टॉप सेंटर्स को और अधिक मजबूत किए जाने की बात कही। साथ ही ड्रग्स के ख़िलाफ़ लगातार कार्यवाही करते हुए एनकॉर्ड की मासिक बैठकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विभाग तत्काल वांछित रिपोर्ट भेजें एवं मामलों के निस्तारण के लिए विभागों द्वारा विवेचनाओं को तत्काल भेजा जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन प्लेटफार्म को अधिक से अधिक जनसंचार किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे की लत से बचाने के लिए शिक्षकों एवं अभिभावकों को अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में भी इसका अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किए जाने की बात कही ताकि लोगों के बीच जागरूकता बढ़े। मुख्य सचिव ने कहा कि नशामुक्ति केंद्रों द्वारा ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं इसकी भी निगरानी की जाए। बड़े सरकारी अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए कुछ बेड रिज़र्व किए जाने की संभावनाओं का परीक्षण कराया जा सकता है।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ, प्रमुख सचिव श्री एल फ़ैनाई, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं सचिव श्री शैलेश बगौली सहित पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और जनपदों से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।
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सीएम धामी के सख्त निर्देश: कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं”*
“ *पुलिस का वर्क कल्चर सुधरे, आम आदमी को न सताया जाए: मुख्यमंत्री”*
“ *दिल्ली एक्सप्रेसवे के बाद पर्यटन उछाल को लेकर सरकार अलर्ट”*
“ *लैंड फ्रॉड पर बनेगा सख्त कानून, दोषियों को नहीं मिलेगी राहत”*
“ *नशा मुक्ति को जन आंदोलन बनाएगी सरकार”*
“ *मुख्यमंत्री घोषणाओं का 100% क्रियान्वयन अनिवार्य”*
“ *कैंची धाम बाईपास जून तक होगा पूरा”*
“ *पुलिस की रात्रि गश्त बढ़ेगी, अपराधियों पर कसेगा शिकंजा”*
“ *1905 पर जीरो पेंडेंसी का लक्ष्य”*
“ *योजनाएं कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए: मुख्यमंत्री”*
*अभियोजन व्यवस्था पर सीएम धामी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अभियोजन कमजोर नहीं होना चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाए*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस और प्रशासन का प्रत्येक विभाग आम जनमानस के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ कार्य करे।
आज सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन, कारागार सुधार एवं जनशिकायत निवारण से जुड़े विषयों पर गहन समीक्षा की।
बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इसे देखते हुए पर्यटकों के लिए होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियाँ समयबद्ध रूप से पूरी की जाएँ। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कैंची धाम बाईपास जून माह तक पूर्ण कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।
पुलिस व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि थाना चौकिया सहित धरातल पर वर्क कल्चर में तत्काल सुधार किया जाए। आम आदमी के साथ मानवीयता, संवेदनशीलता और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने लैंड फ्रॉड के मामलों पर कठोर कानून बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े अपराधों में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
अपराध नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक आत्ममंथन भी आवश्यक है। पुलिस और प्रशासन के सभी विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए।
राजस्व व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राजस्व के वैकल्पिक स्रोत बढ़ाए जाएँ, सब्सिडी योजनाओं के आउटकम का मूल्यांकन किया जाए और राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था को लेकर स्पष्ट किया कि राज्य में शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा से संबंधित शिकायतों पर त्वरित और गंभीर संज्ञान लिया जाए। कानून व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
जनशिकायत निवारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का 100 प्रतिशत क्रियान्वयन जिलों में सुनिश्चित किया जाए। योजनाएँ केवल फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। योजनाओं का नियमित भौतिक सत्यापन हो तथा गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिए कि आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। रात्रि गश्त को और अधिक सघन किया जाए तथा निरंतर पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए।
नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन के रूप में संचालित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाए, जिसकी नियमित समीक्षा गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक द्वारा की जाएगी।
अभियोजन व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अभियोजन कमजोर नहीं होना चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाए।
कारागार विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बंदियों के लिए स्किल डेवलपमेंट, पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं मानवाधिकारों के सख्त पालन के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी-नालों एवं सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध निर्माणों के लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, लेखपाल, पटवारी की जवाबदेही तय की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों और ऐसे अतिक्रमण को संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
भूमि विवादों के निस्तारण के लिए तहसील स्तर पर गठित समितियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने 1905 हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा कर जीरो पेंडेंसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले 6 माह में विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक जनपद के गांवों को 100 प्रतिशत योजनाओं से संतृप्त किया जाए।
डिजिटल गवर्नेंस को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे केवल औपचारिकता न समझा जाए, बल्कि पूरी गंभीरता के साथ धरातल पर लागू किया जाए।
चारधाम यात्रा की तैयारियों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने संबंधित जनपदों में संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।
लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए कि सड़कों के डामरीकरण का कार्य 15 फरवरी तक प्रारंभ किया जाए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।
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हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन से निपटने पर मंथन
देश-विदेश के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ देहरादून में जुटे
यूएलएमएमसी की ओर से पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
देहरादून। हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते भूस्खलन जोखिम और सुरक्षित विकास की चुनौती को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र द्वारा हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र में आपदा-सक्षम विकास विषय पर आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम 02 फरवरी से 06 फरवरी 2026 तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण एवं वित्तीय प्रशासन अनुसंधान संस्थान, सुद्धोवाला, देहरादून में आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, जहां भूस्खलन, भारी वर्षा और भूकंपीय गतिविधियों के कारण निरंतर खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन की प्रक्रियाओं और जोखिम को वैज्ञानिक रूप से समझने, सुरक्षित और टिकाऊ अवसंरचना विकसित करने तथा सड़कों, पुलों और जलापूर्ति जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के लिए दीर्घकालिक और लचीले इंजीनियरिंग समाधान अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विभागों और संस्थानों की तकनीकी क्षमता को मजबूत करना, जोखिम आकलन की प्रक्रियाओं में सुधार लाना और आपदा के बाद पुनर्बहाली तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना है।
नॉर्वे के भू-तकनीकी अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा हिमालयी परिस्थितियों के अनुरूप ढलान स्थिरता, मृदा सुदृढ़ीकरण, सॉइल नेलिंग, जल निकासी उपायों तथा उपग्रह आधारित तकनीकों के माध्यम से जोखिम मानचित्रण पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अवसर पर भूस्खलन विशेषज्ञ डॉ. हाकोन हेयर्डल ने कहा कि हिमालय जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का स्वरूप लगातार बदलता रहता है, ऐसे में वैज्ञानिक अध्ययन, बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव साझा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक साझेदारी के माध्यम से ही हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षित विकास संभव है। बता दें कि डॉ. हकोन हेयर्डल ने दुनिया भर से 32 वर्षों की भूस्खलन विशेषज्ञता और बड़े भूस्खलन जोखिम मानचित्रण और न्यूनीकरण परियोजनाओं का नेतृत्व किया है।
विश्व बैंक के प्रतिनिधि श्री अनुप करण्थ ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तराखण्ड में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपदा तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद राज्य में आपदा पुनर्बहाली, जोखिम प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण के लिए निरंतर सहयोग किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों द्वारा हरिद्वार स्थित मनसा देवी भूस्खलन क्षेत्र का क्षेत्रीय भ्रमण किया गया, जहां वास्तविक हिमालयी परिस्थितियों के आधार पर जोखिम विश्लेषण, न्यूनीकरण उपायों और स्थानीय स्तर पर प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणालियों का व्यावहारिक अध्ययन कराया गया।
कार्यशाला में यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, यूएसडीएमए के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के प्रमुख सलाहकर डाॅ. मोहित पूनिया आदि उपस्थित रहे। कार्यशाला में नेपाल एवं भूटान के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान, उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, यूप्रिपेयर परियोजना, उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग के अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है।
कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य
ऽ हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारणों और जोखिम को बेहतर ढंग से समझना।
ऽ रेखीय विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाना।
ऽ भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण के लिए मानकीकृत और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना।
ऽ विभिन्न संस्थानों के बीच अनुभव साझा करना और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना।
ऽ राज्य एवं विभागीय स्तर पर आपदा जोखिम प्रबंधन की क्षमता को मजबूत करना।
ऽ लोक निर्माण विभाग सहित रेखीय विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
ऽ सड़कों, पुलों और जलापूर्ति प्रणालियों के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ डिजाइन को प्रोत्साहित करना।
ऽ ढलान स्थिरता, मृदा सुदृढ़ीकरण, सॉइल नेलिंग, जल निकासी जैसे उपायों की जानकारी देना।
ऽ उपग्रह आधारित तकनीकों और भू-स्थानिक आंकड़ों के उपयोग को बढ़ावा देना।
ऽ स्थानीय स्तर पर प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में फिल्म “जलमभूमि” के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक श्री के राम नेगी एवं पूरी फिल्म टीम को शुभकामनाएँ एवं बधाई दीं।

उल्लेखनीय है कि यह फिल्म 6 फरवरी को रिलीज होने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “जलमभूमि” जैसी फिल्में समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं और सिनेमा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूती मिलती है।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में फिल्म नीति को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत फिल्म निर्माताओं को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे फिल्म निर्माताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फिल्म शूटिंग पर सब्सिडी, स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को रोजगार के अवसर, तथा स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के माध्यम से राज्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म नीति का उद्देश्य केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तराखंड में वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और फीचर फिल्मों के निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने फिल्म की सफलता की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी सिनेमा और रचनात्मक उद्योगों को हरसंभव सहयोग देती रहेगी।
कार्यक्रम में विधायक श्री दुर्गेश लाल भी उपस्थित रहे।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” अभियान से प्रदेशभर में प्रभावी सुशासन की मिसाल*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जनसुनवाई का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस अभियान के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है।
दिनांक 02 फरवरी 2026 तक प्रदेश के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 548 जनसेवा शिविर (कैंप) आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों के माध्यम से आमजन की भागीदारी और विश्वास में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है।
अब तक की प्रमुख उपलब्धियाँ
इस जनोन्मुखी पहल के अंतर्गत अब तक कुल 4,33,581 नागरिकों का पंजीकरण किया गया है, जिनमें से केवल आज ही 5,398 लोगों ने कैंपों में पंजीकरण कराया। यह आंकड़ा प्रदेश की जनता के सरकार पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
जनता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के त्वरित समाधान पर विशेष बल देते हुए अब तक कुल 42,594 शिकायतों का सफल निस्तारण किया जा चुका है। वहीं 28,721 शिकायतें प्रक्रियाधीन हैं, जिन पर संबंधित विभागों द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है।
योजनाओं का सीधा लाभ जनता तक
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर यह सुनिश्चित किया गया कि कैंपों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिले। अब तक—
61,054 नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया |
2,37,950 लोगों को अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुँचाया गया |
यह अभियान विशेष रूप से दूरस्थ, ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है, जहाँ पहले सरकारी सेवाओं तक पहुँचना कठिन था।
सुशासन की दिशा में मजबूत कदम
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” अभियान इसी सोच का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसमें संवाद, समाधान और संतुष्टि को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रदेश सरकार द्वारा भविष्य में भी इस अभियान को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक स्वरूप देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे, ताकि उत्तराखंड को सुशासन, सेवा और संवेदनशीलता का आदर्श राज्य बनाया जा सके।
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[टिहरी/दिनांक 02 फरवरी, 2026
“तहसील दिवस आयोजन के स्थान में हुआ परिवर्तन ”
आम जनता की शिकायतों /समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में दिनांक 03.02.2026 प्रथम मंगलवार को प्रातः 11.00 से दोपहर 2.00 बजे तक रोस्टर के अनुसार तहसील दिवस आयोजित किये जाने हेतु आदेश निर्गत किया गया था, जिसमें उनके द्वारा आंशिक संशोधन करते हुए दिनोंक 03.02.2026 को तहसील पावकीदेवी के स्थान पर तहसील धनोल्टी में नियत तिथि व नियत समय पर आयोजित किया जायेगा।
उन्होंने समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि दिनॉक 03.02.2026 को तहसील धनोल्टी में उनकी अध्यक्षता में आयोजित होने वाले तहसील दिवस में अनिवार्य रूप से उपस्थित / प्रतिभाग करना सुनिश्चित करें।
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/टिहरी/दिनांक 02 फरवरी, 2026
‘‘सीडीओ टिहरी ने जनता दरबार कार्यक्रम में सुनी जन समस्याएं‘‘
‘‘जनता दरबार कार्यक्रम में 33 आवेदन पत्र दर्ज‘‘
जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल के निर्देशन में आज सोमवार को जिला सभागार नई टिहरी में मुख्य विकास अधिकारी वरूणा अग्रवाल ने जनता दरबार कार्यक्रम के तहत लोगों की समस्याओं को सुना। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के कुल 33 आवेदन पत्र दर्ज किए गए।
इस मौके पर सीडीओ ने सीएम हेल्पलाइन एवं जन समर्पण पोर्टल पर लम्बित शिकायतों की विभागवार समीक्षा करते हुए शिकायतों का समांतर्गत निस्तारण करने तथा मांगों से संबंधित प्रकरणों की प्राथमिकता निर्धारित करते हुए सूची तैयार करने के निर्देश दिए। शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों में पेयजल कनेक्शन को लेकर स्पष्ट डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि सभी विद्यालयों को पेयजल से शत प्रतिशत संतृप्त किया जा सके। साथ ही भूमिहीन भवन/शौचालय विहीन विद्यालयों की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया। लोक निर्माण विभाग को मुआवजे से संबन्धित प्रकरणों को लेकर बैठक आहूत कर निस्तारित करने को कहा गया।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि 07 फरवरी, 2025 तक जिलाधिकारी महोदया की अध्यक्षता में विभिन्न विभागीय योजनाओं की कार्य प्रगति को लेकर रोस्टरवार/विभागवार समीक्षा बैठक आहूत की जाएगी। समीक्षा बैठक के दौरान यदि किसी विभाग का आवंटित धनराशि के सापेक्ष जिला सेक्टर में 75 प्रतिशत, राज्य सेक्टर में 60 प्रतिशत और केंद्र पोषित में 70 प्रतिशत तक व्यय नहीं होता है तो संबंधित के प्रति आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। सभी विभागों को बैठक में आपदा मद में आंवटित सकल धनराशि के सापेक्ष प्रस्ताव के अनुसार बिन्दुवार विवरण पीपीटी में प्रस्तुत करने को कहा गया।
जनता दरबार में ग्राम भेटी निवासी शीतल देवी ने अपनी माता जी का साधन सहकारी समिति लि. ग्रामीण बचत केन्द्र मैगाधार में सवधि जमा (एफडी) की परिपक्कता के बाद भी भुगतान न किये जाने की शिकायत की गई, जिस पर एआर कॉपरेटिव/एलडीएम को तत्काल नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये। ग्राम तोली पट्टी थाती कठूड़ निवासी दर्शनी देवी ने गौशाला तोड़े जाने की धमकी देने की शिकायत की, जिस पर अधिशासी अभियन्ता लोनिवि एवं एसडीएम घनसाली को संयुक्त निरीक्षण कर नियमानुसार एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया।
ग्राम हड़मल्ला निवासी रविन्द्र प्रसाद कोठारी ने अपनी भूमि पर किसी अन्य द्वारा अवैध निर्माण एवं रास्ता बाधित किये जाने की शिकायत तथा वार्ड संख्या-4 नई टिहरी निवासी शेखर सिंह मखलोगा ने दिखोलगांव चम्बा में अपनी भूमि का सीमांकन करवाने का अनुरोध किया, जिन पर एसडीएम टिहरी को नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया। निराश्रित गौवंश हेतु गौशाला भवन निर्माण, पेयजल लाइन, आपदा से क्षतिग्रस्त पैदल मुख्य सम्पर्क मार्ग बनवाने आदि अन्य शिकायत/मांगों को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये गये।
इस मौके पर एसडीएम टिहरी स्नेहिल कुंवर, सीएमओ श्याम विजय सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी भौतिक एवं वर्चुअल माध्यम से बैठक में उपस्थित रहे।










