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राज्यपाल गुरमीत सिंह ने देश एवं प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं

देहरादून; पूर्व संध्या में जारी अपने संदेश में राज्यपाल ने स्वतंत्राता संग्राम के ज्ञात और अज्ञात वीर सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि उनके अदम्य साहस, त्याग और बलिदान से ही स्वतंत्रा भारत का सपना साकार हुआ। उन्होंने कहा कि महान स्वतंत्राता सेनानियों ने देश की आजादी एवं सुरक्षा के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
राज्यपाल ने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है, आने वाले अमृतकाल के 22 वर्षों में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारे कुछ उत्तरदायित्व हैं और आने वाली पीढ़ी के प्रति हमारी कुछ जिम्मेदारियां भी हैं। वर्ष 2047 में जब हम स्वतंत्राता के 100 वर्ष पूरे करेंगे, तब हमारा लक्ष्य एक ऐसा विकसित भारत होगा जो वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाए।
राज्यपाल ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखण्ड देवभूमि निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। योग, आयुर्वेद, हनी, अरोमा और वेलनेस जैसे क्षेत्रों में यहां असीम संभावनाएं हैं। इन प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदाओं का समुचित उपयोग कर इन्हें आर्थिक अवसरों में बदलना हमारी साझा जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने कहा कि पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है। चारधम, कांवड़, हेमकुंड साहिब और मानसखण्ड यात्राओं सहित साहसिक, वेलनेस और इको-टूरिज्म में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष से शुरू हुई शीतकालीन यात्रा के सुखद परिणाम सामने आए हैं पर्यटक की बढ़ती रुचि से स्पष्ट है कि उत्तराखण्ड ‘‘ऑल सीजन टूरिज्म’’ के केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तराखण्ड में समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों की संभावना बनी रहती है, लेकिन इसके बावजूद राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र किसी भी चुनौती के लिए सदैव तैयार है। उन्होंने हाल ही में ध्राली और पौड़ी में आई प्राकृतिक आपदा में हताहत हुए लोगों के प्रति दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा की इस चुनौती ने हमें एक बार पिफर परखा। राज्यपाल ने इस राहत एवं बचाव अभियान में लगे केंद्र और राज्य सरकार की सभी एजेंसियों के कार्मिकों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उनका समर्पण एवं सेवा भाव आपदा प्रबंधन की उत्कृष्ट मिसाल है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड वीरों की भूमि है, जहां के अनेक सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व अर्पित किया है। उन्होंने कहा कि वीर शहीदों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए ‘‘पांचवें धाम’’ के रूप में भव्य सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कृषि, जैविक खेती और औद्यानिकी को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की भी सराहना की।
मातृशक्ति और बेटियों की भूमिका पर गर्व व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनकी मेहनत, समर्पण और साहस ने प्रदेश को हमेशा नई ऊर्जा और दिशा दी है। उन्होंने विश्वास जताया है कि महिलाएं अपनी प्रतिभा और कौशल से उत्तराखण्ड की संभावनाओं को अवसरों में बदलकर इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।
राज्यपाल ने कहा कि नई तकनीकों, एआई, स्पेस, साइबर, क्वांटम, रोबोटिक्स में अनंत संभावनाएं हैं। हमें इन क्षेत्रों में अपनी पहुंच को और मजबूत करने के प्रयास करने होंगे। इन क्षेत्रों में हमारी भागीदारी को बढ़ाना और युवाओं तथा महिलाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना संतुलित विकास के लिए अनिवार्य है।

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